Saturday, 12 September 2015

हर शाम एक आईना मेरा हिसाब करता है ..

मुझे तैरने दे
या
फिर बहना सिखा दे |
अपनी रजा में अब तू रहना सिखा दे ||
मुझे शिकवा ना हो कभी भी किसी से |
हे ईश्वर !!
मुझे सुःख-दुःख के पार जीना सिखा दे ||

ये जो मेरे हालात हैं एक दिन सुधर जायेंगे
तब तक कई लोग मेरे दिल से उतर जायेंगे
................
दिलों में खोट है ज़ुबां से प्यार करते हैं...
बहुत से लोग दुनिया में यही व्यापार करते हैं
बिन धागे की सुई सी ज़िंदगी..
सिलती कुछ नहीं बस..
चुभती जा रही है..
इतने गौर से न देख
तू मेरी सादगी को ,,
बिखरे हुए लोग अक्सर
इसी हाल में होते हैं ..
"ख्वाहिश ये बेशक नही
कि
"तारीफ" हर कोई करे...!
मगर
"कोशिश" ये जरूर है
कि कोई बुरा ना कहे.."
संभाल के खर्च करता हूँ खुद को दिनभर ...
हर शाम एक आईना मेरा हिसाब करता है ..
🌷🌷🌷🌷🌷
खुद में झांकने के लिए जिगर चाहिए
🙏दुसरो की शिनाख्त में तो हर शख्स माहिर हैं....
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
ना ढूंढ मेरा किरदार दुनिया के
हुजूम में,
"वफ़ादार तो हमेशा तनहा ही हुआ करते हैं…!!!

No comments:

Post a Comment

Note: only a member of this blog may post a comment.